Monday, July 15, 2024
Homeफ़ैशन'शादी से पहले लोग सोना चाहते थे हिरोइन...' यश चोपड़ा पर क्यों...

‘शादी से पहले लोग सोना चाहते थे हिरोइन…’ यश चोपड़ा पर क्यों भड़के कई अख्तर?


ऐप पर पढ़ें

जावेद अख्तर अपने दिल की बात जुबान पर आकर जरा भी आर्द्र न करें। फिर चाहे किसी को भी अच्छा लगे या बुरा। उनके कथन बार-बार अस्तित्व में हैं। अब एक रीसेंट इंटरव्यू के दौरान उन्होंने फिल्मों में वुमेन को मीटिंग वाले रोल पर बात की। जैकलीन बोलीं कि रणबीर कपूर और रणबीर कपूर जैसी कई बदली हुई एक्ट्रेस रही हैं लेकिन पूरे करियर में कभी भी बड़ा रोल नहीं मिला। वे जब तक जां फिल्म पर भी भड़कते हैं, जिसमें एक्सक्लूसिव शर्मा अलग-अलग राष्ट्रीयता के लोगों के साथ सोने की बातें करते हैं। जावेद होने ने कहा कि इन फिल्म निर्माताओं को पता ही नहीं है कि दलित का मतलब क्या है, इसलिए हीरोइनों को ऐसे रोल मिल रहे हैं।

प्रतिस्थापित अभिनेत्रियों को नहीं मिला आइकॉनिक रोल
इन फिल्मों में महिला आस्था को जिस तरह से दिखाया जा रहा है, वो हैं जावेद अख्तर। एबीपी माझा ने एक साक्षात्कार में इस मुद्दे पर बात की। जैसी कई सुपरस्टार्स थीं, लेकिन कभी नहीं मिला बड़ा रोल। उन्हें ऐसी फिल्म का ऑफर नहीं मिला जो कि मदर इंडिया, बंदिनी, सुजाता और साहिबा भाभी और गुलाम जैसी आइकॉनिक हो। उन्होंने कहा, यश चोपड़ा, शॉ ने अच्छी फिल्में बनाईं, बहुत शानदार नहीं बल्कि पूरे इतिहास में कॉम्प्लिट मूवीज बनाईं।

जब तक है जान का दिया उदाहरण
जावेद ने कहा कि आज के फिल्म निर्माता एक दलित महिला की छवि बनाने की कोशिश कर रहे हैं और कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि असल में एक दलित महिला कौन है? उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा, उनकी फिल्म जब तक है जान में हिरोइन बोलती है, शादी के पहले पूरी दुनिया में अलग-अलग एक्सेंट वाले मर्दों के साथ सोऊंगी। जावेद बेकार हैं, इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत है?

जावेद बोले, राइटर को पता नहीं क्या है कंटेंट
वह बेकार हैं, एंटीबायोटिक्स के लिए आपको इतनी बड़ी हार्ड वर्कशॉप करने की जरूरत नहीं है। उन्हें इसमें ही क्लासिक महिला दिख रही है। पता ही नहीं है कि लैपटॉप महिला का मतलब क्या है। बाकी महिलाओं को अच्छे रोल नहीं मिल रहे हैं। जावेद बोले कि जब फिल्म में पुरुष गाना, डांस करना या एक्शन करना तब ही फिल्म बहुत होती है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कोई कंटेंट ही नहीं है। जावेद बोले कि फिल्म निर्माता और राइटर को समझ नहीं आ रहा है कि कंटेंट क्या है क्योंकि समाज ही इस बारे में स्पष्ट नहीं है। जिस तरह का कंटेंट लोगों को पसंद आ रहा है वह फिल्म नहीं बनाई जा सकेगी।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments