Tuesday, December 9, 2025
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‘मासूम’ का सीक्वल क्यों नहीं बना शेखर कपूर? सोशल मीडिया पर फ्लाइट का किस्सा शेयर किया गया


साल 1983 में आई फिल्म ‘मासूम’ में शेखर कपूर की कुछ सबसे कल्ट और क्लासिक फिल्में नजर आईं। इस फिल्म को IMDb पर 8.4 रेटिंग मिली है और आप इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। सोशल मीडिया पर कई बार इस फिल्म का सीक्वल बनने को लेकर खबरें आती रहती हैं। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर के साथ हाल ही में स्ट्रेंज सिचुएशन बन गया जब उनकी इस फिल्म की एक फैन फ्लाइट में उनके पास बातचीत हुई।

जब शेखर के पास गया तो फैन बैठ गया

शेखर कपूर ने यह वाकया सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने बताया कि कैसे जब उस फैन ने फिल्म ‘मासूम’ के बारे में बात शुरू की तो वह कुछ देर के लिए रेफ्रिजरेटर लेकर चले गए और सोच में पड़ गए। शेखर कपूर ने फैन के साथ हुई बातचीत को बेवकूफी भरी बातों में शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि आज जब उड़ान में था जब कोई ज्ञान मेरे पास नहीं था। काश वो ना कारोबार होता।

फैन ने कहा- हर बार देखता रहता हूं

शेखर कपूर ने लिखा, “ऐसा नहीं है कि उन्होंने मेरे बारे में कोई विचार नहीं किया, बल्कि उन्होंने जो कहा वह मुझे पसंद आया।” इसके आगे दिग्गज फिल्म डायरेक्टर ने फैन के शब्दों में ही अपनी बात लिखी, “सर मैं महीने में कम से कम एक बार ‘मासूम’ जरूर ढूंढता हूं। हर बार मैं उसे देखता हूं, मुझे इसमें एक बिल्कुल अलग कहानी दिखाई देती है।” है।”

जब पूछा गया सीक्वल को लेकर ये सवाल

इस पर शेखर ने जवाब दिया तो फैन ने जवाब दिया, “मैंने सुना है कि आप सीक्वल बना रहे हैं, मैंने बचपन भी पढ़ा था…सोनदोना..द नेक्स्ट जेनरेशन। हैं ना.?” शेखर ने लिखा, “मैं रेफ्रिजरेटर हो गया…क्योंकि पता था कि आगे क्या आने वाला है।” आगे के फैन ने पूछा, “कैसे सर? कैसे किसी फिल्म की ‘साइरनेशनल शक्ति’ को हराया जा सकता है? कैसे कोई उस फिल्म की पसंद से आगे कुछ कर सकता है?”

शेखर कपूर ने लिखी दिल की बात

शेखर कपूर ने अपने इंस्टा पोस्ट में इस किस्से के बारे में अपने मन की बात लिखी है, ”अब मैं हो रहा था… ये वो बात है जिससे मुझे भी बहुत डर लग रहा है.. मैंने फिर से कहा से लाऊं?” फैन ने पूछा, ”सर वो सीन जिसमें राहुल भैया हथौड़े से अपनी उंगली से उंगली करके चिल्लाते हैं.. और फिर शबाना आजमी के पास दौड़कर जाते हैं और उन्हें ‘मां’ कहकर बुलाते हैं। और फिर वो उस पर चिल्लाते हैं। जब भी मैंने देखा तो मेरा दिल टूट गया।”

शेखर कपूर ने लिखा, “अब मुझे पता चला है कि ‘सदपन’ की वजह से इतनी खूबसूरत फिल्म क्यों बनी थी। मैंने कभी भी फिल्म ‘मॉडल’ को लेकर कुछ पढ़ाई नहीं की है.. ना कभी किसी की मदद की है.. तो फिल्म बनाने को लेकर मेरी क्राफ्ट बिल्कुल जीरो थी। मासूम पूरी तरह से मेरे अंदर से आई नी पर बनी, प्योर इमोशन्स। कोई क्राफ्ट नहीं।”

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उन्होंने लिखा, “यह जो चीज है, मुझे उस फिल्म को बनाने की जरूरत है…ना कि किसी कलाकार की। क्राफ्ट जहां भावनाओं और मन के सहज भावों पर हावी ना हो। कभी भी किसी इमोशन को फोर्स मत करना।” …उदाहरण होते हुए.. भावनाओं को व्यक्त करते हुए.. फिल्म को अपने आप को पा लें। इसे दो शेखर… इसे दो… मैंने अपने आप से कहा। और फिर आराम से आराम मिला। “



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